Home » Culture » कैसे पड़ा सतपुली (नयार घाटी) का नाम, क्या है सतपुली का इतिहास ?

कैसे पड़ा सतपुली (नयार घाटी) का नाम, क्या है सतपुली का इतिहास ?

satpuli ka naam kaise rakha gya

ऐसा कहा जाता है कि सतपुली का नाम इस तथ्य से पड़ा कि कोटद्वार से इसके रास्ते में 7 सात पुल (सात-पुल) हैं। कुछ दशक पहले तक, यह क्षेत्र मुख्य रूप से कृषि भूमि था। धीरे-धीरे, नदी के एक किनारे पर कुछ झोपड़ीनुमा दुकानें खुल गईं। 1951 में सतपुली में भीषण बाढ़ आई, जिससे जान-माल की हानि हुई। कुछ दुकानें और उल्लेखनीय इमारतें, जैसे जीएमओयू प्राइवेट लिमिटेड का कार्यालय बह गया। बाद में, दुकानदार वर्तमान स्थान पर फिर से बस गए। नयार नदी घाटी में आई भीषण बाढ़ में मारे गए लोगों की याद में हाइडल पावर स्टेशन पर एक स्मारक बनाया गया है। सतपुली अपने माछा भात (मछली की करी और चावल) के लिए जाना जाता है। यह कोटद्वार, पौड़ी, श्रीनगर या नयार घाटी के ऊंचे इलाकों में जाने वाले यात्रियों के लिए दोपहर का भोजन या रात का खाना खाने का विश्राम स्थल भी है। अब यह एक टाउन एरिया है।

यह भी पढ़िये :-  उत्तराखंड के पहाड़ बहुत सुंदर हुए इसीलिए नजर लग गई।

Related posts:

उत्तराखंड के टिहरी जिले में मसूरी से यमुनोत्री जाते वक्त उत्तरकाशी बाईपास पर पड़ता है पनीर वाला गाँव...

Our Village

राजगुंधा गांव, हिमाचल प्रदेश, भारत। Rajgundha Village, Himachal Pradesh, India.

Our Village

बांसी, पौडी गढ़वाल, उत्तराखंड। Bansi, Pauri Garhwal, Uttarakhand. 

Our Village

पहाड़ी जिंदगी प्रकृति से जुड़ी, सादगी पूर्ण और संघर्ष पूर्ण होती है।

Culture

गांव मरोड़ा, टिहरी गढ़वाल उत्तराखंड। Village Marora, Tehri Garhwal, Uttarakhand.

Tehri

उत्तराखण्ड राज्य की बेहतरी के लिए योगदान दें 🙏, केवल उत्सव-प्रदर्शन तक सीमित ना रहें।

Culture

पहाड़ी शैली में बने "पठाल" की छत वाले घर उत्तराखण्ड की समृद्ध वास्तुकला के प्रतीक हैं।

General Knowledge

उत्तराखंड के बागेश्वर के मल्ली व तल्ली खरे के बीस गाँवों में परम्परागत तांबे के बर्तन बनाते हैं।

Culture

बुर्फू गांव मल्ला जोहार मुनस्यारी। Burfu Village Malla Johar Munsyari Uttarakhand.

Our Village

About

नमस्कार दोस्तों ! 🙏 में अजय गौड़ 🙋 (ऐड्मिन मेरुमुलुक.कॉम) आपका हार्दिक स्वागत 🙏 करता हूँ हमारे इस अनलाइन पहाड़ी 🗻पोर्टल💻पर। इस वेब पोर्टल को बनाने का मुख्य उद्देश्य 🧏🏼‍♀️ अपने गढ़ समाज को एक साथ जोड़ना 🫶🏽 तथा सभी गढ़ वासियों चाहे वह उत्तराखंड 🏔 मे रह रहा हो या परदेस 🌉 मे रह रहा हो सभी के विचारों और प्रश्नों/उत्तरों 🌀को एक दूसरे तक पहुचना 📶 और अपने गढ़वाली और कुमाऊनी संस्कृति 🕉 को बढ़ाना है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*
*

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.