मैं धराली हूं मैं धराली हूँ,पहाड़ों की गोद में पली एक मासूम सी बच्ची, जिसने झरनों की हँसी सुनी, देवदारों की इस लोरी में आँखें मूंदी, सपनों में जी रही थी सच्ची। मेरे आँगन में बहती थी भागीरथी,खीर गंगा। जैसे माँ की ममता — शीतल,...
मैं धराली हूँ,पहाड़ों की गोद में पली एक मासूम सी बच्ची।















