पहाड़ों में महिलाओं की मेहनत कढ़कती धूप में दिन भर घास का काटना साथ में शाम को 40 kg का बोझ पीठ पर ले जाना वास्तव में पहाड़ों का जीवन बहुत ज्यादा व्यस्त और कठिनाई भरा है क्या आपने अपने काम को खत्म कर दिया है क्या जरूर बताएं।


Related posts:
स्वरोजगार:पौड़ी जिले के बीरोंखाल के श्री दीनदयाल बिष्ट ने अपने बगीचे में लगभग दो सौ पेड़ कीवी लगा डाले...
Agriculture
बद्री दत्त बमोला, जिन्हें बद्री महाराज के नाम से जाना जाता था, फिजी में विधान परिषद के पहले भारतीय स...
Culture
उत्तराखंड रुद्रप्रयाग के अंगद बिष्ट ने MMA (मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स)में चीन में रविवार को हुए फ्लाईवेट...
Culture
ये हैं उत्तराखंड के चमोली गढ़वाल में छोटे से गांव दुपटोली के रहने वाले हस्त शिल्प कलाकार दर्शन लाल।
Culture
हमारे बुजर्गो ने ऐसे घर मे अपना जीवन यापन किया है।
Culture
गढ़वाल के पारंपरिक व्यंजनों के लिए "बूढ़ दादी" होटल हरिद्वार रोड शास्त्री नगर उत्तराखंड।
Culture
बेडू तो पकता नही 12 महीने फिर बेडू पाको बारमाशा क्यों?
Culture
एक दौर था जब खेतों मे क्रिकेट मैच खेले जाते थे गांव का किसी का भी अच्छी लोकेशन पर खेत चुनते थे।
Culture
फिर आ गया अशोज का महिना! जिसका हर पहाड़ी को इंतजार रहता !
Agriculture






