Home » Culture » निराशवादियों को इस टमाटर के पौधे से कुछ सीख लेनी चाहिए।

निराशवादियों को इस टमाटर के पौधे से कुछ सीख लेनी चाहिए।

तस्वीर में आप एक टमाटर के पौधे को देख रहे होंगे, शायद किसी यात्री ने टमाटर खाकर उसके बीज को ट्रेन से फेंक दिया होगा।  ये पौधा मिट्टी की छाती फाड़कर नही बल्कि पत्थरों को चीरकर बाहर आया है।

जब ये और भी नन्हा सा होगा, तब शताब्दी ओर राजधानी जैसे तूफान से भी तेज दौड़ती ट्रेनों के बिल्कुल पास से गुजरते हुए भी इसने सिर्फ बढ़ना सीखा ओर बढ़ते बढ़ते आखिर कार इसने एक टमाटर को जन्म दे ही दिया।

न हाथ है, न पांव है, न ही दिमाग है, और तो और इसको जीवित रहने के लिए कम से कम मिट्टी और पानी तो मिलना चाहिए ही था, जो इसका हक भी था लेकिन इस पौधे ने बिना

यह भी पढ़िये :-  पहाड़ों पर यह सब देख कर भूख लग जाती है। Seeing all this on the mountains makes one hungry.

जल, बिना मिट्टी के, बिना सुविधा के अपने आपको बड़ा किया।  फला फूला और जीवन का उद्देश्य इसने पूरा किया।
जिन लोगो को लगता है कि जीवन मे हम तो असफल हो गए हम तो जीवन मे कुछ कर ही नही सकते, हम तो बस अब बरबाद हो ही चुके है, तो उन्हें इस टमाटर के पौधे से कुछ सीख लेनी चाहिए।

Related posts:

ये कलयुग के राम लक्ष्मण कहलाए, दोनों भाई जीवन भर साथ रहे, विवाह भी नहीं किया।

Culture

पहाड़ में कई बुजुर्गों की जिंदगी की सच्चाई है। This is the truth of the lives of many elderly people...

Culture

ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल मार्ग पर लोकल निवासी से अनुरोध हैं की वहां की जमीन किसी को ना बेचे।

Culture

हरिद्वार के मशहूर बिल्लू भाई के परांठे।  

Culture

पहाड़ी लोग जुगाड़ी 😮 भी है "पुरानी कमीज़ से तकिये का कवर"👌Pillow cover from old shirt.

Culture

पहाड़ का आदमी रिटायर होने के बाद अपनी जिंदगी भर की कमाई पूंजी देहरादून-दिल्ली में मकान बनाकर क्यों खर...

Culture

बदलाव कुछ करने से ही होता है। Change happens only by doing something.

Culture

"नया नौ दिन पुराना सौ दिन" उत्तराखंड के ये मकान आज भी समय की मार से बचे हुए है।

Culture

1987 में बनी गढ़वाली सूपर हिट फ़िल्म बेटी ब्वारि कि पुरानी यादें भाई बलदेव राणा जी के साथ।

Culture

About

नमस्कार दोस्तों ! 🙏 में अजय गौड़ 🙋 (ऐड्मिन मेरुमुलुक.कॉम) आपका हार्दिक स्वागत 🙏 करता हूँ हमारे इस अनलाइन पहाड़ी 🗻पोर्टल💻पर। इस वेब पोर्टल को बनाने का मुख्य उद्देश्य 🧏🏼‍♀️ अपने गढ़ समाज को एक साथ जोड़ना 🫶🏽 तथा सभी गढ़ वासियों चाहे वह उत्तराखंड 🏔 मे रह रहा हो या परदेस 🌉 मे रह रहा हो सभी के विचारों और प्रश्नों/उत्तरों 🌀को एक दूसरे तक पहुचना 📶 और अपने गढ़वाली और कुमाऊनी संस्कृति 🕉 को बढ़ाना है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*
*

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.