Home » Culture » पहाड़ के सीढ़ीनुमा खेतों में बन रहे हैं सीढ़ीनुमा मकान। Terrace Farming Inspires Step-Style Houses in Uttarakhand Himalayan Mountain Villages.

पहाड़ के सीढ़ीनुमा खेतों में बन रहे हैं सीढ़ीनुमा मकान। Terrace Farming Inspires Step-Style Houses in Uttarakhand Himalayan Mountain Villages.

पहाड़ के सीढ़ीनुमा खेतों में बन रहे हैं सीढ़ीनुमा मकान

उत्तराखंड और हिमालयी क्षेत्रों की पहचान रहे सीढ़ीनुमा खेत (Terrace Farming) आज केवल खेती तक सीमित नहीं रह गए हैं। बदलते समय, बढ़ती आबादी और सीमित समतल भूमि के कारण अब इन्हीं सीढ़ीनुमा खेतों की तर्ज पर सीढ़ीनुमा मकानों का निर्माण भी तेज़ी से हो रहा है। यह बदलाव पहाड़ों की जीवनशैली, वास्तुकला और पर्यावरण—तीनों को नई दिशा दे रहा है।

सीढ़ीनुमा खेत: पहाड़ की सदियों पुरानी समझ

पहाड़ों में खेती करना हमेशा से एक चुनौती रहा है। ढलान, मिट्टी का कटाव और पानी की कमी जैसी समस्याओं के समाधान के रूप में सीढ़ीनुमा खेतों का विकास हुआ। ये खेत न केवल मिट्टी को बहने से रोकते हैं, बल्कि वर्षा जल को सहेजकर खेती को टिकाऊ बनाते हैं। यही पारंपरिक समझ आज पहाड़ी मकानों की डिज़ाइन में भी दिखाई दे रही है।

सीढ़ीनुमा मकान: ज़रूरत से जन्मी नई वास्तुकला

आज जब पहाड़ों में समतल ज़मीन दुर्लभ होती जा रही है, तब लोग ढलान पर सीढ़ीनुमा मकान बना रहे हैं। ऐसे मकानों में हर मंज़िल पहाड़ की ढलान के अनुसार पीछे या आगे खिसकी होती है—ठीक वैसे ही जैसे खेतों की सीढ़ियाँ। इससे ज़मीन का बेहतर उपयोग होता है, निर्माण लागत नियंत्रित रहती है और घर प्राकृतिक ढलान के साथ सामंजस्य बिठाता है।

यह भी पढ़िये :-  बुर्फू गांव मल्ला जोहार मुनस्यारी। Burfu Village Malla Johar Munsyari Uttarakhand.

पर्यावरण के अनुकूल और सुरक्षित

सीढ़ीनुमा मकानों की सबसे बड़ी खासियत है कि ये पर्यावरण के अनुकूल होते हैं। पारंपरिक पहाड़ी पत्थर, लकड़ी और स्थानीय सामग्री का उपयोग इन्हें मज़बूत बनाता है। ढलान के अनुरूप डिज़ाइन होने से भूस्खलन का जोखिम भी कम होता है। साथ ही, प्राकृतिक रोशनी और हवा का बेहतर प्रवाह घरों को ऊर्जा-कुशल बनाता है।

पहाड़ी जीवनशैली और आधुनिकता का संगम

इन मकानों में पारंपरिक पहाड़ी जीवनशैली और आधुनिक सुविधाओं का सुंदर मेल देखने को मिलता है। नीचे की मंज़िलों में पशुपालन या भंडारण, बीच की मंज़िलों में रहने की जगह और ऊपर की ओर खुली छतें—यह सब पहाड़ों के सामाजिक ढांचे से जुड़ा हुआ है। आज होमस्टे, गेस्ट हाउस और पर्यटन से जुड़े निर्माणों में भी यह शैली लोकप्रिय हो रही है।

यह भी पढ़िये :-  वाहन चालकों के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण। टोल की रसीद की कीमत को समझें और उसका उपयोग करें।

पहाड़ों की पहचान को बचाने की पहल

सीढ़ीनुमा मकान केवल एक निर्माण शैली नहीं, बल्कि पहाड़ों की पहचान को बचाने का प्रयास भी हैं। यदि योजनाबद्ध तरीके से स्थानीय वास्तुकला को अपनाया जाए, तो विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं। उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों में यह मॉडल भविष्य की sustainable housing का आधार बन सकता है।

निष्कर्ष

पहाड़ के सीढ़ीनुमा खेतों से प्रेरित सीढ़ीनुमा मकान यह साबित करते हैं कि प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर भी विकास संभव है। यह बदलाव न केवल ज़रूरत है, बल्कि पहाड़ी संस्कृति, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक समझदार कदम भी है। MeruMuluk.com ऐसे ही पहाड़ी सरोकारों और ज़मीनी सच्चाइयों को सामने लाने का मंच बना रहेगा।

Related posts:

पहाड़ों में महिलाओं की मेहनत कढ़कती धूप में दिन भर घास का काटना।

Culture

ये है अनिता नेगी, उत्तराखंड के पौड़ी जिले अंतर्गत गरूड़ चट्टी नीलकंठ मार्ग पर पिछले 30 सालों से पकोड़े...

Uttarakhand Latest

दिल्ली से लैंसडाउन पहुँचने का सम्पूर्ण विवरण। Complete details of reaching Lansdowne from Delhi.

Uttarakhand Tourism

मैं धराली हूँ,पहाड़ों की गोद में पली एक मासूम सी बच्ची।

Culture

औली, उत्तराखंड के चमोली ज़िले में स्थित एक हिल स्टेशन। Auli, a hill station in Chamoli district of U...

Uttarakhand Tourism

खाती गांव उत्तर भारत के उत्तराखंड क्षेत्र में बसा एक आकर्षक गांव।

Our Village

लोल्टी गांव थराली चमोली उत्तराखंड। Lolti Village Thrali Chamoli Uttarakhand. 

Our Village

उत्तराखंड के चमोली जिले के छोटे से गांव आली मज्याडी से निकले दिगंबर सिंह रावत ने आज अंतरराष्ट्रीय स्...

Khel-Khiladi

पहाड़ो मैं मडूवे की फसल तयार होने लग गई है। The Maduwa crop has started getting ready in the mountai...

Uttarakhand Tourism

About

नमस्कार दोस्तों ! 🙏 में अजय गौड़ 🙋 (ऐड्मिन मेरुमुलुक.कॉम) आपका हार्दिक स्वागत 🙏 करता हूँ हमारे इस अनलाइन पहाड़ी 🗻पोर्टल💻पर। इस वेब पोर्टल को बनाने का मुख्य उद्देश्य 🧏🏼‍♀️ अपने गढ़ समाज को एक साथ जोड़ना 🫶🏽 तथा सभी गढ़ वासियों चाहे वह उत्तराखंड 🏔 मे रह रहा हो या परदेस 🌉 मे रह रहा हो सभी के विचारों और प्रश्नों/उत्तरों 🌀को एक दूसरे तक पहुचना 📶 और अपने गढ़वाली और कुमाऊनी संस्कृति 🕉 को बढ़ाना है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*
*

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.