जिस तरह से यहाँ की नारी अपना दायित्व निभाती है, उनपर ये कहावत सटीक बैठती है। जंगल से घास ,लकड़ियाँ लाने से लेकर, खेत खलिहान में काम करना ओर घर के चौके चूल्हे से लेकर अनेकों कार्य जिस तरह से करती है वो काबिलेतारीफ है।

Related posts:
स्वरोजगार:पौड़ी जिले के बीरोंखाल के श्री दीनदयाल बिष्ट ने अपने बगीचे में लगभग दो सौ पेड़ कीवी लगा डाले...
Agriculture
उत्तराखंड के इन पुराने घरों के छज्जे की ठंडक, किसी एयर कंडीशनर से कम नहीं।
Culture
हमारे बड़े-बुजुर्ग कहते थे चाहे कितनी ही विपत्ति आ जाए पर अपने पूर्वजों की घर कुड़ी मत बेचना।
Culture
बूंदी लड्डू जैसा दिख रहा है यह फल भारत के भी कई राज्यों में पाया जाता है क्या आपको इसका नाम पता है।
Culture
ग्राम बंगाली, पंचायत चौरा विकासखंड थैलिसैण जनपद पौड़ी गढ़वाल में झँगोरा, मंडुआ एवं धान की फसल
Culture
क्या है भोजन विधि का वैज्ञानिक रहस्य?
Culture
उत्तराखंड में स्वरोजगार को प्रत्मिकता देते हुए। होली के ढ़ोल से लेकर सभी प्रकार के वाद्य यंत्र।
Culture
🛕 Shri Raghunath Temple Devprayag – Spiritual Heritage of Tehri Garhwal, Uttarakhand, श्री रघुनाथ मं...
Culture
ये वीरान पड़े खुबसूरत घर इस बात के गवाह हैं कि पहाड़ का पानी और पहाड़ की जवानी वाकई में पहाड़ों के ब...
Culture






