कोदे की रोटी और पिस्यूं लूण (चटनी)।

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ये है विनोद मैठाणी अपने गाँव के प्रति प्यार ने इनको नौकरी छोड़ गाँव में ही स्वरोजगार करने की प्रेरणा ...
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पूरी बाखली पलायन कर गयी जहां कभी खुशियाँ बसती थी। The entire Bakhli has fled where happiness used to...
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पहाड़ों में पिंगली लाल ककड़ियाँ खाने का भी एक अपना आनंद है मित्रों।
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उत्तराखंड मैं पुराने समय के परम्परागत भवन उन्नत इंजीनियरिंग। Traditional House of Uttarakhand.
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बामणी गांव का अनूठा 'नंदालोकोत्सव! बद्रीनाथ मंदिर के पास स्थित है।
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बंद पड़े ताले 🔐 , आँगन में उगती घास 🍀, वीरान होते पहाड़।
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उत्तराखंड की "पहाड़ी बाखली" हर तरफ शांति और सुकून,खूबसूरत पहाड़ों की वादियाँ।
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हमारे पुरखों ने जो मकान बनाया हमारे लिए वह हमें आवाज लगा रहे हैं आ जाओ प्लीज।
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उत्तराखंड में ऐसे घरों को "बाखली" पहाड़ी घरों का समूह होता है जिनमे कई परिवार रहते है।
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