ये पहाड़ के मीठे करेले है . मीठे करेले की बहुत ही अच्छी सब्जी बनायी जाती है. बरसात के बाद इन को सूखाकर (सुकसा) बना कर, सर्दियों मैं सब्जी बनायी जाती है।
मीठे करेले की सब्जी उत्तराखंड में बरसात का मौसम में।


ये पहाड़ के मीठे करेले है . मीठे करेले की बहुत ही अच्छी सब्जी बनायी जाती है. बरसात के बाद इन को सूखाकर (सुकसा) बना कर, सर्दियों मैं सब्जी बनायी जाती है।

टिहरी जिले के प्रताप नगर विकासखंड की ओण पट्टी के दो दर्जन से अधिक गांवों में कल से धान की कटाई – मंडाई की धूम मची है। उत्सव सा माहौल है। शुरू के दिन को कौंळी या लवार्त – मंड्वार्त भी कहा जाता है। पूरी...

फिर आ गया अशोज! जिसका हर पहाड़ी को इंतजार रहता ! जी हां हर पहाड़ी को ! जहां पहाड़ में रहने वाले की सारी दिनचर्या बदल जाती है और वो कमरकस के तैयार हो जाता है इस काम के महायुद्ध में दो दो हाथ करने...

घुंघची गुंजा या घुंघची किसी चमत्कार से कम नहीं एक समान होता है इसके बीजों का आकार और वजन सोना तौलने में भी होता है गुंजा के बीज का उपयोग यह शब्द लगभग हर जगह सुनने को मिलता है। जैसे – ‘रत्ती भर भी परवाह...

घड़े जैसा दिखने वाला ये चीज है ‘कोडोंग’ यह धान भंडारण का नेचुरल बुलेटप्रूफ कवच है, गुंगू के पत्तों से इसे बनाया जाता है, इसमें रखें अनाज खराब नहीं होते, उसमें कीड़े,घुन नहीं लगते हैं। झारखंड की असुर ट्राइब जो गुमला और लातेहार जिले के...

ये वो बीज हैं जिन्हें बेकार समझकर फेंक दिया जाता है और ये बड़े बड़े मॉल में पैकेट में बन्द होकर बड़ी कीमत पर बेचे जाते हैं। हम सब छोटे थे तब मेरी मां तवे पर इनको सेंक कर दे देती थी और हम सब...

‘हिमालयन वियाग्रा’ को कीड़ा जड़ी या यार्सागुम्बा कहा जाता है। इसे कैटरपिलर फंगस या कॉर्डिसेप्स सिनेंसिस के नाम से भी जाना जाता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी भारी मांग के कारण इसकी कीमत लाखों में है। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ और हिमाचल प्रदेश के ऊपरी हिमालयी...

3,000 साल का पुराना इतिहास । भारत में महुआ शराब का एक लंबा इतिहास है, इसका उत्पादन और खपत प्राचीन काल से है। महुआ का पेड़ मुख्य रूप से मध्य, उत्तरी और दक्षिणी भारतीय जंगलों में पाया जाता है, खासकर मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा...

लैंटाना एक बहुवर्षीय मजबूत झाड़ी है, जो अधिक वर्षा और सूखा दोनों के प्रति सहनशील है। इसके एक ही गुच्छे में 2-3 रंगों के फूल देखने को मिल जाते हैं, जो समय के साथ-साथ रंग बदलते रहते हैं। इस पौधे से एक तीक्ष्ण गंध निकलती...

नागर मोथा नाम की घास है। ज्यादातर खेतो के आसपास यू ही उग जाती है। यह खेतों में छोटी प्रजाति का होता हैं। नदी नालों में बड़ी प्रजाति का होता हैं। छोटी प्रजाति में ख़ुशबू ज़ायदा होती हैं और दवाओं में काम आता हैं। इसका...