अपने जीवन की जंग हारने के बाद भी हार नहीं मानी, और यह कटा हुआ पेड़ बता रहा है कि पहले से ज्यादा अपने सिर पर बोझ लेकर के भी “मैं जीवित हूं”

Related posts:
जीवन की पहली किताब उस रोशनी के नाम थी जिसे हम ‘लम्फू’ कहते थे।
Culture
पलायन की मार झेलता ये घर। पहाड़ो में ऐसे सेंकड़ों मकानों की जजर्र हालत बन गई है ।
Culture
दिल्ली में 11 लाख के पैकेज को छोड़ डा. सबिता पौड़ी गढ़वाल आकर बनी प्रगतिशील बागवान।
Uttarakhand Latest
शानदार ग्राम पंचायत सुतोल जो की चमोली में है ये दृश्य अपने आप में मनमोहक है।
Culture
एक दौर था जब खेतों मे क्रिकेट मैच खेले जाते थे गांव का किसी का भी अच्छी लोकेशन पर खेत चुनते थे।
Culture
मसूरी (उत्तराखंड) में मुलिंगर में 1945 की एक शानदार तस्वीर। A stunning photo from 1945 at Mullingar ...
Culture
क्या आपने उत्तराखंड के नैन सिंह रावत का नाम सुना है । Have you heard of Nain Singh Rawat from Uttara...
Culture
पहाड़ी क्षेत्रों में होटलो का जो स्वरूप था अब वह बदल रहा है वहां पर छोटे-छोटे कॉटेज नुमा घर बन रहे ह...
Culture
पहाड़ों के सीढ़ीदार खेत कभी भोले भाले पहाड़ी लोगों की जीवनशैली का मुख्य हिस्सा थे।
Culture






